Friday, January 16, 2009

प्यार का खुमार

पिछले दिनों से मन में,
कुछ तो हलचल सी है|
तेज धड़कनें और,
हाथों में कम्पन सी है|
सब कुछ अच्छा-अच्छा,
और मनभावन सा लगता है|
कुछ बोरिंग प्रोफेसर का भी,
लेक्चर अच्छा सा लगता है|
बैठे-बैठे चेहरे पर यूँ ही,
मुस्कान बिखर जाती है|
और फ़िर आँखें जाने
किन यादों में खो जाती हैं|
आंखों में कुछ तो अनदेखे,
चेहरे पल भर को दिखते हैं|
फ़िर वैसे ही जल्दी से,
छूमंतर हो जाते हैं|
ये कैसा धुंधलका है, जिसने अपने पीछे
जाने कौन सा, चेहरा छुपा रखा है|
ये धुंध हटने के, इंतज़ार में ही
दिन पूरा कट जाता है|
और रातें भी करवटें,
बदल-बदल कट जाती हैं|
मखमल का बिस्तर भी,
सुइयों सा चुभता है
कौन है जिसका चेहरा,
सपनों में भी दिखता है|
कौन हो तुम, क्यूँ मेरी
नींदें उदा रही हो,
क्यूँ हौले-हौले मुझे,
दीवाना बना रही हो|
अब तो सपनों की, दुनिया से बाहर आओ
कौन हो तुम आख़िर, कुछ तो बतलाओ|


4 comments:

tilak123 said...

waah bhai waah! very well written...

Bhautik said...

Woh kaun hai!!
Nazar mila ke muskura gayi jo!!!
hehe :P

omi said...

very well written...vse bhabhiji h kaun? :) :)

Unknown said...

Very well xpressed..:) :)