
लाइब्रेरी में मेरे सामने की डेस्क पर बैठी,
एक लड़की बड़े मन से पड़ने में मशगूल थी ।
पर बालों की एक लट ,
उसके होठों का स्पर्श करने को ,
बार-बार कान के पीछे से बाहर आ जाती थी ,
और वो बड़ी चपलता से उसको ,
फ़िर कान के पीछे कर देती थी ।
वो मस्त थी अपने काम में ,
और मैं (उसे देखने के)अपने काम में ।
फ़िर चली हवा से ,
कुछ बाल उसके मुँह में चले गए,
और उसने लट के नीचे से ,
अपने गालों पर हाथ फ़िराते हुए ,
बड़ी ही फुर्ती से एक ही बार में,
सब को बाहर कर दिया ।
में तो लगभग मुस्करा ही दिया उसकी फुर्ती से ,
फ़िर मैंने अपने आस-पास देखा कि,
किसी ने देखा तो नहीं ।
यह जान कर कि बाल होठों के स्पर्श के बाद ,
मतवाले हो गए हैं ,
उसने उन्हें संवार के बाँधने का सोचकर ,
बाल खोले ही थे ,
कि तभी चली हवा से बाल ,
इतना जोर से उड़े मानो,
वो बस इसी पल के इंतज़ार में थे,
और वे सब उसके गालों और होठों के स्पर्श को मचल रहे हैं,
उसने क्लिप को मुँह में पकड़ा ,
और दोनों हाथों से ,
उन मचलते बालों को डाँटते हुए पकड़ा ,
और उनको मोड़ते हुए फ़िर से क्लिप में बाँध दिया।
और मैं अब भी इंतज़ार कर रहा हूँ ,
कि कब फ़िर से एक लट ,
उसकी क्लिप में से बाहर निकले ,
और वो अपने हुनर से उनको सँवारती रहे ,
और मैं उसको देखता रहूँ...एकटक !!!
