Friday, January 9, 2009

हे प्रियतम सच बोलो ...

प्रियवर तेरे जाने के बाद
आंखों में खालीपन है
तन्हाई में
तेज हवा के झोंके
सूँ
सूँ करके
कुछ तो कहने को आतुर हैं
हे प्रिय सच बोलो
क्या तुमने इनसे कोई
संदेश मुझे भिजवाया है
हे प्रिय सच बोलो
क्या तेरे सपने भी
अब खाली खाली रहते हैं
या अब उनमें
नया कोई चेहरा
दिखलाई
पड़ता है
हे प्रिय सच बोलो.
....
अषाण
के बादल
गरज गरज कर
काफी जल बरसाते हैं
और हवा के झोंकों
संग मिलकर
सराबोर कर जाते हैं
हे प्रिय सच बोलो
क्या तुमने इनसे कोई
संदेश मुझे भिजवाया है
हे प्रिय सच बोलो
क्या ये अविरत बारिश
तेरे आंसू हैं
क्या तू भी रो-रोकर
मुझे याद करती है
या फ़िर तूने
ये बारिश
मेरे आंसू धुलने को भेजी है
क्या अब मेरा
रोना भी बेकार है
क्या अब तेरे दिल ने
मेरे लिए धडकना
भुला दिया है
हे प्रिय कुछ तो बोलो....
सर्दी में जब सर्द हवा
खून जमाती है
और उसके झोंके
नश्तर
के जैसे
बदन को चुभते हैं
हे प्रिय सच बोलो
क्या तुमने इनसे कोई
संदेश मुझे भिजवाया है
हे प्रिय सच बोलो
क्या ये नश्तर सी
चुभती सर्दी से तुम
अपनी याद दिलाती हो
या फ़िर तुमने
सर्दी के सारे
इंतजाम कर रखे हैं
आग जलाकर, गरम कपडों में
तुम सर्दी का
आनंद उठाती हो
हे प्रिय सच बोलो
क्या तू मुझको
बिल्कुल भूल गई है
क्या अब तुझको मेरी
बिल्कुल भी याद नहीं आती
क्या तुम इन सब मौसम के
आनंद उठाती हो
जबकि मैं घुट-घुटकर
तिल तिल करके
हर मौसम में
थोड़ा थोड़ा मरता हूँ
हे प्रियतम अब तो सच बोलो....

2 comments:

the_infamous said...

i really liked the poem the best part is how the poet just took many situations and showed the pros n cons for the same. i found it really amazing how to describe the same situation with a positive n negative feel. the poem is really good!!

Bhautik said...

Pyaar ne shayar ko ghayal kiya aur uski kavita ko aur sajaya and sawara...needless to say androni bhavnaao ko bekhubi se chitrit ki gayi hai is rachna mein...
good goin tanki!!!
:)